इंजीनियरों ने मोबाइल बंद रखकर जताया विरोध-Jagran

Submitted by VK Gupta on Wed, 27/07/2011 - 11:33am

इंजीनियरों ने मोबाइल बंद रखकर जताया विरोध

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला :
पंजाब में बिजली क्षेत्र का प्रबंधन करने वाली दोनों कंपनियों पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) के लगभग सभी इंजीनियरों ने पंजाब सरकार की ओर से राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र से बिजली उत्पादन ना करवाने की अपनाई जा रही नीति के विरोध में मंगलवार को दो घंटे की पेन डाउन व टूल डाउन हड़ताल की। इसके चलते बिजली इंजीनियरों ने अपने मोबाइल फोन भी बंद रखे। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक विरोध जताने के अलावा इंजीनियरों ने राज्य सरकार की बिजली उत्पादन नीति पर श्वेत पत्र भी जारी किया। राज्य में प्रस्तावित 1320 मेगावाट क्षमता के थर्मल प्लांट का निर्माण पावरकॉम के इंजीनियरों से करवाने की मांग पर राज्य सरकार की ओर से अपनाई जा रही ढुलमुल नीति पर पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रधान इंजी. एचएस बेदी और महासचिव इंजी. भूपिंदर सिंह ने कहा कि एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल जनप्रतिनिधियों से मिलकर बताएंगे कि किस तरह से राज्य का बिजली उत्पादन निजी क्षेत्र के हवाले किया जा रहा है। पावरकॉम के प्रबंधन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव अनुसार एक भी पैसा अपनी ओर से खर्च किए बगैर राज्य सरकार थर्मल प्लांट का निर्माण करवा सकती है। प्लांट पर खर्च होने वाले सात हजार करोड़ रुपये एक समझौते के तहत पावर फाइनेंस कारपोरेशन कर रहा है, जबकि पावरकॉम का हिस्सा इसमें मात्र दस फीसदी का होना है। कुछ नौकरशाह राज्य की राजनीतिक सत्ता को गुमराह कर रहे हैं। वहीं, जारी किए गए श्वेत पत्र में बताया गया है कि 1995 तक राज्य में बिजली की मांग से ज्यादा उत्पादन हुआ करता था। इसके बाद 2000 तक में थोड़ी गिरावट आनी शुरू हुई। वर्ष 2000 में 600 मेगावाट के रणजीत सागर बांध और 1998 के 420 मेगावाट के लहरा मुहब्बत प्लांट के अलावा अगले आठ सालों में मात्र 500 मेगावाट क्षमता ही जोड़ी जा सकी है। लहरा मुहब्बत का दूसरा चरण पूरा होने के अलावा अगले डेढ़ साल में भी कुछ नहीं हुआ है, जबकि मांग व आपूर्ति का अंतर बढ़ता गया है।